राजस्थान के गांवों की राजनीति अब धीरे-धीरे उस दौर से बाहर निकलती दिखाई दे रही है, जहां राजनीति सिर्फ बंद कमरों, बड़े मंचों और सफेद कुर्तों तक सीमित रहती थी।
हनुमान बेनीवाल की राजनीति ने ग्रामीण इलाकों में एक अलग तरह की राजनीतिक भाषा को सामने रखा है—सड़क पर खड़े होकर सवाल करना, गांव के मुद्दों को सीधे सत्ता के सामने रखना और आम आदमी की आवाज को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाना।
इस बदलाव का असर सिर्फ एक नेता या एक पार्टी तक सीमित नहीं है। गांव का मतदाता भी अब भाषण से ज्यादा अपने बीच खड़े व्यक्ति को देखना चाहता है। उसे दिखावटी शालीनता से ज्यादा जमीन से जुड़ी आवाज चाहिए, और बंद कमरों की राजनीति से ज्यादा अपने खेत, पानी, सड़क, रोजगार और सम्मान से जुड़े सवालों की राजनीति चाहिए।
शायद यही वजह है कि राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में राजनीति का पुराना चेहरा बदलता हुआ महसूस हो रहा है। सफेद कपड़ों की चमक से ज्यादा अब मिट्टी से जुड़े सवाल दिखाई देने लगे हैं।
क्योंकि गांव की राजनीति आखिरकार गांव के बीच से ही निकलेगी—और जब गांव सवाल पूछना सीख जाता है, तो राजनीति का अंदाज भी बदलना पड़ता है।
[8/10, 13:34] Omprakash Godara: नागौर जिले के जायल तहसील अंतर्गत रूणिया गाँव और उसकी 13 ढाणियों में पिछले तीन महीनों से पीने के पानी की गंभीर किल्लत बनी हुई है। ग्रामीणों द्वारा नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल को लिखे गए पत्र के अनुसार, क्षेत्र में जल आपूर्ति पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है।
गाँव के सरकारी स्कूल के पास स्थित पशुओं के पानी पीने की खेलियाँ पूरी तरह सूखी और खाली पड़ी हैं। पानी न मिलने के कारण बेज़ुबान पशुधन और बेसहारा मवेशी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं और उनकी हालत अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी गाँव में पानी की सप्लाई शुरू की जाती है, तो कुछ दबंग/अवैध लोग वाल्व (Valve) को घुमा देते हैं, जिससे ढाणियों तक जाने वाली पानी की सप्लाई बंद हो जाती है। इस संबंध में जब पानी चालू करने वाले व्यक्ति/कर्मचारी से शिकायत की गई, तो उसने कोई समाधान करने के बजाय अभद्र जवाब दिया कि “जो करना है कर लो, पानी नहीं दूँगा”।
प्रशासन और जल विभाग की इस अनदेखी तथा लापरवाही के कारण ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीण मदनलाल डिडेल, पेमाराम धायल, शुभकरण नायक, उमेश नायक, भँवरलाल नायक और राजेन्द्र डिडेल सहित अन्य लोगों ने इस समस्या पर तुरंत ध्यान देकर जलापूर्ति बहाल करने की गुहार लगाई है।