घड़साना किसान आंदोलन में बड़ा मोड़: सिंचाई के पानी की मांग पर हजारों किसानों का श्रीगंगानगर कूच, NH-911 पर महापड़ाव
घड़साना/श्रीगंगानगर, राजस्थान | 11 अक्टूबर 2026
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र में किसानों के सिंचाई पानी के संघर्ष ने अब बड़ा रूप ले लिया है। अनूपगढ़ शाखा में सिंचाई के पानी की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से जारी आंदोलन के बीच राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल किसानों के समर्थन में मैदान में उतर आए। 10 अक्टूबर को घड़साना की धानमंडी में आयोजित किसान सभा के बाद आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया। प्रशासन के साथ बातचीत बेनतीजा रहने पर किसानों ने श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय की ओर कूच करने का फैसला किया।
किसानों के साथ सड़क पर रातभर डटे रहे बेनीवाल
इस आंदोलन की सबसे चर्चित तस्वीर उस समय सामने आई, जब हनुमान बेनीवाल किसानों के साथ सड़क पर रात बिताते नजर आए। किसानों की मांगों को लेकर उन्होंने केवल मंच से भाषण देने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि आंदोलनकारियों के बीच रहकर उनका साथ दिया।
बेनीवाल की मौजूदगी ने आंदोलन को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया। सिंचाई के पानी का मुद्दा अब किसानों की आजीविका के साथ-साथ सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव का विषय बन गया है।
रात में श्रीगंगानगर की ओर निकला किसानों का काफिला
10 अक्टूबर की रात प्रशासन के साथ वार्ता से समाधान नहीं निकलने के बाद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में किसानों ने श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय की ओर कूच किया। ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों के साथ निकले किसानों को रास्ते में 12 MD टोल नाके के पास पुलिस की बैरिकेडिंग का सामना करना पड़ा।
इसके बाद आंदोलनकारियों की भीड़ बढ़ती गई और देर रात पतरोड़ा के पास नेशनल हाईवे-911 पर किसानों ने पड़ाव डाल दिया। बेनीवाल भी किसानों के साथ वहां मौजूद रहे। इस घटनाक्रम से इलाके में यातायात प्रभावित हुआ और प्रशासन के सामने आंदोलन को लेकर चुनौती बढ़ गई।
चार सूत्रीय मांगों पर अड़े किसान
किसानों का मुख्य मुद्दा सिंचाई के पानी का उचित वितरण और फसलों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है। आंदोलन में चार सूत्रीय मांगों को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि पानी की कमी से बुवाई और सिंचाई प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर उनकी फसल और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
बेनीवाल ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की चेतावनी दी। उनका कहना था कि समाधान नहीं निकलने पर आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
वार्ता विफल, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
11 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन के साथ बातचीत में सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद किसानों ने हाईवे पर अपना महापड़ाव जारी रखा और मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही। 12 अक्टूबर की रिपोर्टों में भी वार्ता बेनतीजा रहने और आंदोलन जारी रहने की जानकारी सामने आई।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजस्थान में किसानों के लिए सिंचाई पानी की उपलब्धता और उसके वितरण का सवाल प्रमुखता से उठा दिया है।
अब सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
घड़साना का यह आंदोलन केवल पानी की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की फसल, मेहनत और भविष्य से जुड़ा सवाल बन गया है। सड़क पर किसानों के बीच रात बिताते हनुमान बेनीवाल की तस्वीर आंदोलन का प्रतीक बनकर सामने आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार किसानों की चार सूत्रीय मांगों पर कब और क्या फैसला लेती है। क्या बातचीत से समाधान निकलेगा, या किसानों का यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा?
किसानों का संदेश साफ है—सिंचाई का पानी चाहिए और मांगों पर ठोस निर्णय होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
रिपोर्ट: राजस्थान किसान आंदोलन | घड़साना, श्रीगंगानगर

